जनता के सवालों के जवाब यूं कब तक छुपाए जाएंगे?
बजट-पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण ने 'विकसित भारत' के नाम पर निजीकरण और कॉर्पोरेटपरस्ती के जिस रास्ते की हिमायत की है, उसकी पूरी झलक आज पेश बजट में है। लेकिन हर...
झूठ का पुलिंदा है राष्ट्रपति का अभिभाषण!राष्ट्रपति के द्वारा संसद में दिया जाने वाला वक्तव्य, जिसे राष्ट्रपति का अभिभाषण कहा जाता है, स्वयं उनके द्वारा लिखा गया वक्तव्य नहीं होता है। यह वक्तव्य उस सत्ताधारी पार्टी द्वारा लिखा जाता...
नेताजी की विरासत पर सियासी दावेदारी क्यों?
"हिंदुत्व के समर्थक नहीं, विरोधी थे नेताजी!"ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का भारत के उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवादी नेतृत्व के प्रति प्यार उमड़ पड़ा हैं।...
"सामाजिक सुधार के लिए सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख का संघर्ष, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।"
सावित्री और फातिमा : एक अभिन्न जीवनसदियों से शक्तिशाली लोगों द्वारा राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऐतिहासिक घटनाओं...
यत्र-तत्र-सर्वत्र मिनी पाकिस्तान ढूंढती नैनो बुद्धि!
घूम-फिरकर कुनबा फिर अपने प्रिय पाकिस्तान की पनाह में पहुँच गया है। इस बार कोलम्बस बने हैं महाराष्ट्र की चार इंजिन वाली सरकार के मछली जल की रानी और जहाजरानी विभाग के मंत्री नीतेश...
If journalism is the mother of democracy or journalists are the fourth pillar of democracy, then believe me, on the night of January 3, it was found buried in the septic tank of a state-cherished contractor in Bijapur of...
" जुबान नहीं फिसली है, असल बात जुबान पर आ गई है! "मैंने लिखा था, वे गांधी-नेहरू के बाद अंतिम हमला आंबेडकर पर ही बोलेंगे, आखिर अमित शाह ने आंबेडकर पर हमला बोल ही दिया।भारत को हिंदू राष्ट्र में तब्दील...
संसद के शीतकालीन सत्र में ‘संविधान के 75 वर्ष’ के गौरवशाली मौके पर लोकसभा में दो दिनों की बहुत जीवंत बहस हुई। इसमें तमाम तरह के राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे उठे। सत्तापक्ष का जोर समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर रहा।
कई...
बुलडोज़र गाथा
इंडियन एक्सप्रेस (18 नवंबर, 2024) में सुहास पलसीकर लिखते हैं : "हमारे लोकतंत्र के साथ जो गड़बड़ी है, बुलडोज़र उसका एक अभिलक्षण है। अदालत ने आख़िरकार भौतिक बुलडोज़र पर ग़ौर फ़रमाया है और इसके ग़ैर-क़ानूनी इस्तेमाल को रोकने...
'कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना' साधते सीकरी के असाधु और असंत
कुनबे की हड़बड़ी कुछ ज्यादा ही बढ़ी दिख रही है ; उन्मादी ध्रुवीकरण को तेज से तेजतर और उसके तरीकों को अशिष्ट से अभद्रतम तक पहुंचाया जा रहा...