चर्चा-समीक्षा

आरएसएस 100 साल पूरे: भारतीय संविधान, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रभाव

भारतीय तिथि के अनुसार 2 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना को सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। पिछले 11 वर्षों से आरएसएस, जो एक सांप्रदायिक-फासीवादी संगठन है, देश पर शासन कर रहा है और भारत...

भगत सिंह की 118वीं जयंती: क्या ‘जेन-जी’ पूरा कर रही है शहीद-ए-आज़म के सपनों को?

आज, जब हम महान क्रांतिकारी और विचारक शहीद भगत सिंह की 118वीं जयंती मना रहे हैं, यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या उनके सपनों का भारत बन पाया है? भगत सिंह ने जिस शोषण-मुक्त और न्यायपूर्ण समाज की...

मणिपुर का दर्द और मोदी का ‘पर्यटन’: 865 दिनों के इंतजार के बाद भी ज़ख्मों पर मरहम क्यों नहीं?

पूरे 2 साल 4 महीने 10 दिन बाद देश के प्रधानमंत्री को मणिपुर की याद आई और 13 सितम्बर को वे पर्यटन करने, पीड़ा से कराहते, डरे सहमे और असुरक्षित नागरिकों के बीच जा पहुंचे। 3 मई 2023 को...

पूंजी, श्रम और मानवता का भविष्य: कॉरर्पोरेट मुनाफा और आदिवासी सीख

आज जब दुनिया विकास की नई ऊंचाइयों को छू रही है, तब एक सवाल बार-बार उठता है - क्या इस विकास की कीमत इंसान और इंसानियत चुका रहे हैं? कल-कारखानों से लेकर खेतों तक, दिन-रात पसीना बहाने वाले मजदूरों...

धर्मस्थल का सच: सैकड़ों अप्राकृतिक मौतें और दफ़न, न्याय की अनकही कहानी

धर्मस्थला में दबे सत्य और न्याय को उजागर करना जरूरी हरे-भरे जंगलों और धीमी-धीमी बहती जलधाराओं से घिरा, और चूंकि यह बरसात का मौसम है - बहते पानी का तेज़ खिंचाव, बारिश की पुकार करते मोर और तोतों की चहचहाहट ;...

विश्व आदिवासी दिवस पर सत्ता का मौन: भाजपा “आदिवासी” शब्द से क्यों डरती है?

"जब पूरी दुनिया आदिवासी दिवस मना रही थी तब भारत में भाजपा ने चुप्पी क्यों साध ली? जानिए “आदिवासी” शब्द से उनके डर की असली वजह और उसके राजनीतिक मायने।" 9 अगस्त को पूरे विश्व में, विश्व आदिवासी दिवस मनाया...

‘किताब उठाओ’ बनाम ‘किताब जलाओ’: शिक्षा पर दो विपरीत दर्शनों का टकराव

शिक्षा: दो विरोधी परिप्रेक्ष्य - कम्युनिस्ट और आरएसएस भारत में कम्युनिस्ट अपने कार्य क्षेत्रों में स्कूल और कालेज स्थापित करने के लिए अक्सर सार्वजनिक चंदे करते और सार्वजनिक प्रयास करते आए हैं। बेशक, यह आरएसएस जैसे फासिस्ट संगठनों द्वारा बच्चों के...

भारतीय ज्ञान प्रणाली या संघी दर्शन? शिक्षा के ज़रिए संविधान की जगह मनुवादी व्यवस्था लाने का प्रयास

भारत में पीएचडी शोध करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को यूजीसी-नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) देनी होती थी, जो 2024-25 तक भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 'सहायक प्रोफेसर' तथा 'जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सहायक प्रोफेसर' के लिए भारतीय नागरिकों...

इमरजेंसी में संघ का सरेंडर? लेखक का दावा- माफीनामों से भर गया था जेल का कनस्तर, डर से बंद हो गई थी शाखा

अथ संघ सरेंडर गाथा: आंखों देखा इमरजेंसी अध्याय संघ के संग सरेंडर की संलग्नता सनातन है, इतनी सतत और सुदीर्घ है कि हिंदी के व्याकरण में एक अक्षर से शुरू होने वाले शब्दों के अलंकारों में एक नया अलंकार सृजित कर...

जनगणना और आदिवासी धर्म: पहचान के लिए संघर्ष, क्यों है अलग कॉलम की मांग?

"जनगणना और आदिवासी पहचान का सवाल!" जनगणना 2027 के लिए गजट अधिसूचना में जो इतनी ज्यादा देर की गई है, उसकी हो रही आलोचना पूरी तरह से सही है, क्योंकि वादा किया गया था कि जनगणना के  साथ ही जाति...

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वीबी-ग्रामजी नियम भेदभावपूर्ण, मनरेगा को जारी रखे सरकार: बृंदा करात ने केंद्र को लिखा पत्र

नई दिल्ली (आदिनिवासी)। केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए ग्रामीण रोजगार कानून ‘वीबी-ग्रामजी’ (विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन) के नियमों को लेकर नीतिगत और जमीनी विवाद खड़ा हो गया है। माकपा की वरिष्ठ नेता बृंदा करात ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखकर इन नए नियमों […]