चर्चा-समीक्षा

धर्म और संस्कृति: समाज की दो धाराएं, मानव सभ्यता की यात्रा में क्या अधिक महत्वपूर्ण है?

सभ्यता के भोर से लेकर आज के डिजिटल युग तक, मानव समाज ने विचारों, व्यवस्थाओं और विश्वासों का एक लंबा सफर तय किया है। इस यात्रा के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं - धर्म और संस्कृति। ये दोनों...

जल, जंगल और जमीन: आदिवासी संघर्ष से मानवता के भविष्य तक

"प्रकृति की रक्षा का सवाल केवल आदिवासियों का सवाल नहीं, पूरी मानवता के भविष्य का सवाल है।" जल, जंगल और जमीन - ये केवल तीन शब्द नहीं हैं। ये मानव जीवन के तीन बुनियादी आधार हैं। मनुष्य का भोजन, पानी,...

क्या अमेरिका में मोहन भागवत के बयानों से बदल जाएगी आरएसएस की जमीनी हक़ीक़त?

अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन! "अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान रहें ही नहीं, तो वह हिंदू रहेगा ही नहीं।" और यह भी कि, "अगर कोई खुद को हिंदू कहता है,...

मानव सभ्यता: विकास की यात्रा और मानवता के मायने, सोच से सच तक

आदिम समाज ने जब पहली बार पत्थर को हथियार बनाया था, तब शायद उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि यह छोटा-सा कदम एक ऐसी यात्रा की शुरुआत बनेगा, जो जंगलों से निकलकर अंतरिक्ष तक जा पहुँचेगी। सभ्यता का यह सफर सीधी रेखा में नहीं चला – इसमें उतार-चढ़ाव हैं, संघर्ष हैं, और हर मोड़ पर […]

उदन्त मार्तण्ड से गोदी मीडिया तक: हिंदी पत्रकारिता के दो सौ साल का कड़वा सच

उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक हिंदी पत्रकारिता के दो सौ बरस (30 मई 1826 - 30 मई 2026) यूं तो हाल के लगभग डेढ़ दशक भारतीय प्रेस – विशेषकर हिंदी भाषी प्रेस --  के धीरे-धीरे तेज से तेजतर हुए...

जनता को त्यागमंत्र का उपदेश, खुद रोड शो और विदेश यात्रा – मोदी की ‘देश बंदी’ का असली चेहरा

जो दवा के नाम पे जहर दे, उस चारागर की तलाश पूरी: अब देश बंदी की तैयारी वे जब भी, जो भी करते हैं, एकदम नया और चौंकाने वाला करते हैं। वे कोई भी रूप धारण कर सकते हैं, किसी...

फोटोशूट, रैलियां और सैर-सपाटा – पर देश का प्रधानमंत्री कहां है?

छुट्टी पर प्रधानमन्त्री, मौज मस्ती में मोदी! जितनी फुर्सत में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, उतनी निश्चिन्तता और मौजमस्ती में दुनिया का शायद ही कोई राष्ट्र प्रमुख हो। पूरी दुनिया फिक्रमंद हुई पड़ी है, ट्रम्प और नेतन्याहू के थोपे...

पालतू सूअर से नफरत की राजनीति: दिल्ली में सांप्रदायिक ज़हर फैलाने का नया खेल

पालतू सूअर : नफरत की राजनीति का नया हथियार  दिल्ली के त्रिनगर के निवासी कुछ हिन्दू परिवारों ने पूजा-अर्चना का एक नया तरीका ईजाद किया है। इसका एक लाभ यह है कि इससे उनके मुसलमान पड़ोसी परेशान और दुखी होते...

युद्ध ने खोली पोल: गैस संकट से उजागर हुई भारत की उर्वरक नीति की हिमालयी भूल; खतरे में किसान

गैस आपूर्ति में रुकावट से उर्वरक नीति की खामियां उजागर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में गंभीर रुकावटें आई हैं, जिसके परिणामस्वरूप उर्वरक उत्पादन में कटौती, आयात में गिरावट, कीमतों में बढ़ोतरी और...

नारी वंदन का पाखंड: परिसीमन बिल को महिला आरक्षण बताकर देश को गुमराह करने की भाजपा की साजिश बेनकाब

नारी वंदन का घड़ियाली क्रंदन 17 अप्रैल की शाम देश की लोकसभा ने एक खतरनाक साजिश को ठुकरा दिया। पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों के बीचों-बीच विशेष अधिवेशन बुलाकर मोदी सरकार ने 131वें संशोधन विधेयक को पारित कराने का जो...

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धर्म और संस्कृति: समाज की दो धाराएं, मानव सभ्यता की यात्रा में क्या अधिक महत्वपूर्ण है?

सभ्यता के भोर से लेकर आज के डिजिटल युग तक, मानव समाज ने विचारों, व्यवस्थाओं और विश्वासों का एक...