कोरबा: रोजगार व पुनर्वास की मांग पर किसान सभा ने कुसमुंडा मुख्यालय पर जड़ा ताला, कार्यालय में नहीं घुस पाए अधिकारी-कर्मचारी, देश मे पहली बार हुई किसी SECL मुख्यालय की तालाबंदी

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कोरबा/कुसमुंडा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने मिलकर आज एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्यालय के दोनों गेटों पर ताला जड़ दिया। इस आंदोलन के कारण सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी दिन भर कार्यालय में घुस नहीं पाए। कल ही एसईसीएल प्रबंधन ने आंदोलन को टालने के लिए दोनों संगठनों के नेताओं से अपील की थी, लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा। आंदोलनकारी नेताओ ने बिलासपुर से उच्चाधिकारियों को बुलाने की मांग की, जिस पर कुसमुंडा प्रबंधन ने अपनी असमर्थता व्यक्त कर दी थी। देश में पहली बार किसी एसईसीएल मुख्यालय की 13 घंटों तक तालाबंदी की गई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 630 दिनों से विस्थापन प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसान रोजगार तथा मुआवजा, अधिग्रहित जमीन की वापसी और पुनर्वास गांवों में बुनियादी सुविधाएं देने, महिलाओं को स्वरोजगार से लगाने आदि मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं। उनका यह धरना 31 अक्टूबर 2021 से जारी है। इस बीच आंदोलनकारियों कई बार प्रदर्शन, कार्यालय घेराव तथा खदानबंदी करते हुए जेल भी गए हैं, लेकिन बार-बार के आश्वासनों के बावजूद एसईसीएल ग्रामीणों की समस्याओं को सुलझा नहीं पाया है। इससे विकास के नाम पर अपने गांव और जमीन से बेदखल कर दिए गए विस्थापित परिवारों का जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर होता जा रहा है। इससे एसईसीएल के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ते ही जा रहा है।

किसान सभा द्वारा कुसमुंडा मुख्यालय की तालाबंदी के आंदोलन को कल ग्रामीणों का जबरदस्त समर्थन मिला। सुबह 7 बजे से ही उन्होंने कार्यालय के दोनों गेटों पर ताले जड़ दिए और रात 8 बजे तक यह तालाबंदी जारी थी। इससे आज कोई भी अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में घुस नहीं पाया और कार्यालय पूरी तरह से बंद रहा। सैकड़ों भूविस्थापितों ने गेट पर धरना दिया और अपनी मांगों को दुहराते हुए नारे लगाते रहे। उन्होंने प्रबंधन द्वारा गेट खुलवाने की हर चाल को नाकाम किया। उन्होंने कुछ घंटों तक कुसमुंडा खदान और कोयला परिवहन को भी ठप्प रहा। भू-विस्थापितों के आक्रोश और आंदोलन में शामिल महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिस भी कोई दखल नहीं दे पाई। इस आंदोलन के कारण आज एसईसीएल को करोड़ों रुपयों का नुकसान पहुंचा है। इस आंदोलन के बाद 29 जुलाई को एसईसीएल प्रबंधन ने बिलासपुर में वार्ता के लिए आंदोलनकारियों को आमंत्रित किया है।

माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू, जय कौशिक, सुमेंद्र सिंह ठकराल, मोहन यादव, अमृत बाई, तेरस बाई, आशा,छत बाई, हेम बाई भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव, दामोदर श्याम, रघु, दीनानाथ, बृजमोहन आदि ने इस सफल आंदोलन के लिए ग्रामीणजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भूविस्थापितों के चल रहे संघर्ष को और तेज करेगी। रोजगार, पुनर्वास और भूमि वापसी संबंधी जायज मांगों को एसईसीएल को पूरा करना ही होगा।

भू-विस्थापितों के इस आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन दिया है। 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण इस क्षेत्र में किया गया था। तब से आज तक भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और मानवीय सुविधाओं के साथ पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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