चर्चा-समीक्षा

चालीस चोरों का खजाना और गरीबी के नखरे दिखाती चौकीदारों की दरोगाईन

इधर 400 पार का गुब्बारा फुलाने में खुद मोदी जी की साँसें फूली जा रही हैं, उधर उनकी वित्तमंत्राणी ने लोकसभा चुनाव लड़ने से ही पल्ला झाड़ लिया। वे प्याज पहले ही नहीं खाती थीं, अब चुनाव भी नहीं...

भारत में चुनावी बॉन्ड घोटाला: लोकतंत्र की हत्या का नया तरीका

भाजपा सरकार ने 2017 में तमाम विपक्षी दलों के विरोध और चुनाव आयोग तथा रिज़र्व बैंक की मनाही के बावजूद फाइनैन्स बिल के रास्ते यानी राज्यसभा से कन्नी काटकर चुनावी बांड की जो योजना लागू की, वह भ्रष्टाचार को...

सनातन धर्म बनाम हिंदू धर्म

"हाल ही में अरुण माहेश्वरी की 8 अध्यायों में विभाजित एक छोटी-सी पुस्तिका "सनातन धर्म : इतना सरल नहीं" आई है। यह पुस्तिका सनातन धर्म और हिंदू धर्म के बीच के संबंधों और विवादों का गहराई से तथ्यपरक विश्लेषण...

रंग बरसे: आइए खेलें, डेमोक्रेसी के संग होली!

(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा) देखा, देखा! कैसे विरोधी, डेमोक्रेसी के मर्डर का शोर मचा रहे हैं? मर्डर और वह भी डेमोक्रेसी का? वाकई! पर कैसे? कह रहे हैं कि केजरीवाल की गिरफ्तारी, डेमोक्रेसी का मर्डर है। सिंपल मर्डर भी नहीं, सीएम...

मनरेगा को खत्म करने की साजिश: काम के अधिकार को बचाने के लिए भाजपा को हराना ही एकमात्र रास्ता: किसान सभा

आईये मिलकर किसानों के हित के लिए लड़ें: मनरेगा को बचाने और भाजपा को हराने का आह्वानहाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के वर्किंग पेपर नंबर 107 में ग्रामीण भारत में नागरिकों की क्रय शक्ति में नकारात्मक रुझान...

डर-डर का खेल: जो छिपा रहे हो, वही कहीं सबसे बड़ा डर तो नहीं?

लगने को तो अनेक को लग सकता है कि हमारे प्रधानमंत्री जी बड़े विनोदी हैं, मजाकिए भी हैं। हालांकि अगर ऐसा लगता है तो कोई अजीब बात भी नहीं। ऐसा लगना सिर्फ अनुमान नहीं है, इसमें भरी-पूरी सच्चाई है। इसके...

एसबीआई: 2014 से ही बना हुआ है खालाजी का घर; जानिए क्यों!

बात 2014 की है। प्रधानमंत्री का अभी सेहरा बांधने के निशान मिटे भी नहीं थे - संसद की सीढियां उन पर बहाए गए आंसुओं से अभी भी गीली थी... और जिस तरह नयी नयी साईकिल सीखने वाला चौराहे की...

2024 चुनाव से पहले CAA नियमों की अधिसूचना: एक गंभीर राजनीतिक चाल या सामाजिक न्याय?

दिसम्बर 2019 में पास किये गये भेदभावकारी और विभाजनकारी अन्यायपूर्ण नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने वाली नियमावली की अधिसूचना 2024 चुनावों की अधिसूचना आने से ठीक पहले जारी करना एक राजनीतिक साजिश का संकेत है। जैसा कि अमित...

अंबानी परिवार का सगाई समारोह: रिहाना से लेकर बिल गेट्स तक, जामनगर में जश्न; वैभव की अश्लीलता और बदलता भारत

विगत 01 से 03 मार्च तक भारत ने जो देखा, वह एक धनकुबेर द्वारा अपने वैभव का अश्लील मुजाहिरा ही नहीं था, बल्कि अपनी सम्पन्नता की विपुलता का सहारा लेकर देश की सभ्यता और उसमे बसी मनुष्यता के प्रति...

मोदी टास्क: युवाओं के लिए अनूठा ऑफर; एक सेल्फी, एक ऐप और बहुत सारा मजा!

भाजपा के सुप्रीमो युगपुरुष मोदी जी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि देश की जनता जब उनसे प्रधानमंत्री – जिस रूप में वे शायद ही कभी रहे हों - के नाते खेत के बारे में कुछ जानना चाहती...

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बिरसा की विरासत से खिलवाड़: आदिवासी अधिकारों पर हिंदुत्व का नया दांव

क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाती है आदिवासियों की संवैधानिक पहचान? आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान को...