चर्चा-समीक्षा

बेरोजगारी भत्ता योजना छत्तीसगढ़: 02 वर्ष पुराने पंजीयन वाले ही बेरोज़गारी भत्‍ते के लिये पात्र हैं

नया पंजीयन कराने और पंजीयन का नवीनकरण कराने की कोई आवश्‍यकता नही है. रायपुर (आदिनिवासी)। कुछ स्‍थानों से ऐसी सूचना मिली है कि रोज़गार कार्यालयों में पंजीयन कराने के लिये बहुत सारे लोगों की भीड़ लग रही है, जिसके कारण...

भारत के 110 करोड़ लोग हिन्दू क्यों नहीं हैं?

सन 1995 तथा अब सन 2017 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि हिंदू कोई धर्म नहीं है। साथियों, आजकल हिन्दू हिन्दू हिन्दू हिन्दू , आप जिधर देखो उधर हिन्दू या हिन्दुस्तान ! यही...

वन संरक्षण कानून में संशोधन विधेयक: उदारीकरण और केंद्रीकरण की दिशा में आदिवासियों पर एक और हमला

भले ही सत्तारूढ़ पार्टी ने संसद में विपक्षी दलों के किसी भी हस्तक्षेप को रोका हो, लेकिन उसने बिना चर्चा के सरकारी कामकाज को आगे बढ़ाना जारी रखा। इनमें से एक था वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में संशोधन के...

डिग्री-मुक्त पीएमओ उर्फ़ हम डिग्री नहीं दिखाएंगे!

व्यंग : राजेंद्र शर्मा भाई! विरोधियों की ये तो सरासर बेईमानी है। जब मोदी जी-शाह जी एनआरसी ला रहे थे, तब क्या हुआ था, वह याद है या नहीं? सरकार बेचारी समझा-समझा के हार गयी, पर विरोधियों ने पब्लिक...

भगोड़े को भगोड़ा मत कहो! भागने वालों की घर वापसी भी तो जरूरी है!

व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा अब तो विरोधियों को भी मानना पड़ेगा कि मोदी जी ने वाकई पूरी दुनिया में इंडिया का डंका बजवा दिया है। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं, मोदी सरनेम वाले दूसरे कई लोग भी, इंडिया का...

आदिवासियों ने किसी भी धर्म के लोगों का धर्मांतरण नहीं करवाया

दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले प्रकृति पूजक और रक्षक आदिवासी हमेशा मानवतावादी और सहिष्णु होते हैं, उन्होंने धर्म और संप्रदाय के नाम पर लोगों के बीच भेदभाव नहीं किया, इतिहास गवाह है कि हम सभी...

तुम्हारी जाति क्या है? आईआईटी में सबसे पहला सवाल: कब सुधरेगा सिस्टम?

लोकसभा के हालिया शीत सत्र में पेश आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा 05 सितंबर 2021 से 05 सितंबर 2022 के बीच आरक्षित पदों पर नियुक्तियों के अभियान चलाये जाने के शोर-शराबे के बावजूद आईआईटी संस्थानों में आरक्षित श्रेणी...

अमृत काल में स्वच्छ भारत, स्वच्छ संसद: अब विपक्ष मुक्त भारत की ओर

व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा विपक्ष वाले भी गजब करते हैं। राहुल गांधी को जरा-सा संसद से बाहर क्या कर दिया गया, लगे और जोर-जोर से डैमोक्रेसी का मर्सिया पढऩे। उस पर इसका स्मार्ट उलाहना और कि राहुल गांधी ने जो-जो...

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के हक में सुप्रीम प्रहार

पुरानी कहावत है कि सचाई अक्सर कड़वी लगती है। कैंब्रिज विश्वविद्यालय में राहुल गांधी के भारत में जनतंत्र की वर्तमान दशा और दिशा पर चिंता जताने पर, मौजूदा सत्ताधारियों द्वारा जो बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया की गयी है, जिसमेें भारत...

वह भीड़ जो जुलूस नहीं बन पाई: उनको कोसें नहीं, बल्कि उनसे बात करें !

सीहोर के पास कथावाचक प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में इकट्ठा हुए 10 लाख लोगों ने जो पीड़ा, यंत्रणा और त्रासदी झेली उसकी खबर सबने देखी है। इनमें बच्चे थे, बुजुर्ग थे, महिलायें थीं। कई की मौत हो गयी...

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बिरसा की विरासत से खिलवाड़: आदिवासी अधिकारों पर हिंदुत्व का नया दांव

क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाती है आदिवासियों की संवैधानिक पहचान? आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान को...