चर्चा-समीक्षा

सवाल किसी शुकुल के पेशाब कांड भर का नहीं, उससे आगे का है!

सीधी के पेशाब-काण्ड पर अनेक प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं। शब्दों में, भावनाओं में, प्रदर्शनों में आलोचनाओं में, निंदाओं में, भर्त्सनाओं में कुछ ने खूब तिलमिलाहट से, तो कुछ ने किंचित शांत भाव से भाजपा विधायक के प्रतिनिधि भाजपाई नेता...

नौकरी का मोह छोड़ो, स्टार्टअप के पीछे दौड़ो

व्यंग : राजेंद्र शर्मा हम तो पहले ही कहते थे। मोदी जी की याददाश्त इतनी खराब थोड़े ही है कि हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा करने के बाद भूल गए होंगे। मोदी जी अब अगर नौकरियों की बात...

अंधेरों से ज्यादा मुखर होते हैं उजालों के दस्तक

महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के विरुद्ध पूरे देश को झकझोर देने वाली हाल के दौर की एक शानदार लड़ाई की नेतृत्व त्रयी विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने कहा है कि "सरकार ने भाजपा सांसद ...

समान नागरिक संहिता: समानता का नाम, भेदभाव बढ़ाना है काम

मोदी-शाह की भाजपा को 2024 के आम चुनाव में हिंदुत्ववादी ध्रुवीकरण के उछाल के लिए, अयोध्या के राम मंदिर से लेकर, काशी तथा उज्जैन को कॉरीडोरों तक का सहारा कम पड़ता लग रहा है। आम चुनाव से कुछ ही...

कॉमन सिविल कोड: कॉमन की चाहत है, ना इरादा ही सिविल है!

14 जून को अचानक भाजपा नीत केंद्र सरकार की प्रज्ञा जाग्रत हुई और अपने विधि विभाग की ओर से उसने समान नागरिक संहिता - कॉमन सिविल कोड - पर एक बार फिर देश भर से सुझाव, सलाहें और प्रस्ताव...

गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार: पुनि-पुनि गांधी हत्या

अमृतकाल-पूर्व का भारत होता तो बेशक, इसके भोंडेपन पर आम तौर पर हंसा ही जा रहा होता। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में, उनकी सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली समिति, गोरखपुर के ‘‘गीता प्रेस’’ को वर्ष...

बहुजन राजनीति को भोथरा बनाने में किसका हाथ?

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार की जमीन पर, सदियों से सताए दलित और पिछड़ों की राजनैतिक ऊर्जा को दक्षिणपंथी विचारधारा ने छल-बल, सत्ता, खौफ और धन की ताकत से कमजोर ही नहीं किया है, अपितु अपने हितों के अनुकूल...

मणिपुर: उत्तर-पूर्व की बारूद में ‘हिंदुत्व’ की माचिस

मणिपुर को जलते हुए इन पंक्तियों के लिखे जाने तक छह हफ्ते हो चुके हैं। पर हैरानी की बात नहीं है कि शाह का चार दिनी दौरा भी भाजपाई मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासन पर आम जनता का, खास...

मध्य प्रदेश: शकुनि के पासों से खेलने की कमल (नाथ) छाप चतुराई

दो चुनाव पूर्व सर्वे में धमाकेदार पूर्वानुमान, शिवराज सिंह की जाहिर उजागर हड़बड़ी और बौखलाहट, भाजपा में असंतोष की खदबदाहट के बावजूद कमलनाथ बेचैन है और इस बेचैनी में वे इतने अकुलाये हुए हैं कि शकुनि के पांसों से...

आदिवासी हिंदू क्यों नहीं हैं?

भारत में अनुसूचित आदिवासी समूहों की संख्या 700 से अधिक है। भारत में 1871 से लेकर 1941 तक हुई जनगणनाओं में आदिवासियों को अन्य धर्मों से अलग धर्म में गिना गया। जैसे 1871 में ऐबरजिनस (मूलनिवासी), 1881 और 1891...

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बिरसा की विरासत से खिलवाड़: आदिवासी अधिकारों पर हिंदुत्व का नया दांव

क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाती है आदिवासियों की संवैधानिक पहचान? आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान को...