चर्चा-समीक्षा

बहुजन राजनीति को भोथरा बनाने में किसका हाथ?

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार की जमीन पर, सदियों से सताए दलित और पिछड़ों की राजनैतिक ऊर्जा को दक्षिणपंथी विचारधारा ने छल-बल, सत्ता, खौफ और धन की ताकत से कमजोर ही नहीं किया है, अपितु अपने हितों के अनुकूल...

मणिपुर: उत्तर-पूर्व की बारूद में ‘हिंदुत्व’ की माचिस

मणिपुर को जलते हुए इन पंक्तियों के लिखे जाने तक छह हफ्ते हो चुके हैं। पर हैरानी की बात नहीं है कि शाह का चार दिनी दौरा भी भाजपाई मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासन पर आम जनता का, खास...

मध्य प्रदेश: शकुनि के पासों से खेलने की कमल (नाथ) छाप चतुराई

दो चुनाव पूर्व सर्वे में धमाकेदार पूर्वानुमान, शिवराज सिंह की जाहिर उजागर हड़बड़ी और बौखलाहट, भाजपा में असंतोष की खदबदाहट के बावजूद कमलनाथ बेचैन है और इस बेचैनी में वे इतने अकुलाये हुए हैं कि शकुनि के पांसों से...

आदिवासी हिंदू क्यों नहीं हैं?

भारत में अनुसूचित आदिवासी समूहों की संख्या 700 से अधिक है। भारत में 1871 से लेकर 1941 तक हुई जनगणनाओं में आदिवासियों को अन्य धर्मों से अलग धर्म में गिना गया। जैसे 1871 में ऐबरजिनस (मूलनिवासी), 1881 और 1891...

अमित शाह की खिलाड़ियों से मुलाक़ात: सौ कोड़े खाने के बाद फिर सौ प्याज खाने का समय

शनिवार 03 जून की रात यौन उत्पीडन के खिलाफ आन्दोलनरत खिलाड़ियों की गृहमंत्री अमित शाह से हुयी मुलाक़ात के बाद गोदी मीडिया ने खिलाड़ियों के डर जाने, आन्दोलन के बिखर जाने और साक्षी मलिक और नाबालिग बच्ची के...

हादसा नहीं काण्ड है, और मानवीय चूक नहीं, नीतियों की अमानवीयता की मिसाल है बालासोर की मौतें

02 जून की शाम 07 बजे ओड़िसा के बालासोर रेलवे स्टेशन के करीब तीन रेलगाड़ियों के आपस में भिड़ जाने के हादसे में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 290 मौतें गिनी जा चुकी हैं। करीब 1000 घायल मिल...

कानून का राज खत्म होने की दहलीज पर

अदालत में वकील साथियों से बातचीत में मैंने कहा कि देश में कानून का राज खत्म होने की दहलीज पर है और बस एक चर्चा शुरू हो गई। जो निष्कर्ष निकल कर आए, वे निम्न हैं:- 1) सर्वोच्च न्यायालय...

उद्घाटन: नई संसद भवन का या रेंगती धार्मिक राजशाही का?

नरेंद्र मोदी के राज के नौ साल की एक अनोखी उपलब्धि है। कथनी और करनी में अंतर तो संभवत: हरेक राज में ही होता है, पर मोदी राज में इस अंतर को बढ़ाते-बढ़ाते इतनी ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया...

कबीर: आध्यात्म, व्यवसाय, सत्ता और यथार्थ

आज से लगभग 568 वर्ष पूर्व सद्गुरु कबीर साहब का जन्म/प्राकट्य बताया जाता है। उनकी जीवन काल के दौर के भारतीय समाज मे धर्म और आडम्बर आधारित मतभेद के कारण कबीर एक क्रांतिकारी विचारधारा प्रवर्तक बनकर सामने आये। भारतीय...

इस्‍तीफ़ा न मांगियो कोय

व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा किसी ने सही कहा है कि इस्‍तीफ़ा मांगने वालों को तो इस्‍तीफ़ा मांगने का बहाना चाहिए। बताइए, बालासोर में रेल दुर्घटना हुई नहीं कि आ गए इस्‍तीफ़ा मांगने - रेल मंत्री इस्‍तीफ़ा दो! और कुछ इस्‍तीफ़ा-याचकों...

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बालको ब्लॉक कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित – अनुभव और युवा ऊर्जा का संगम

कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। दर्री जमनीपाली ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन की कड़ी में अब बालको ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ए.डी....