दुर्ग (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक धमधा गढ़ में 13 और 14 जून को आयोजित दो दिवसीय गोंडवाना महाअधिवेशन का समापन कमलेश सोरी के पारंपरिक राजतिलक के साथ हुआ। हाल ही में संपन्न हुए लोकतांत्रिक चुनावों में श्री सोरी को केंद्रीय गोंडवाना गोंड महासभा का अध्यक्ष चुना गया था। रविवार को हजारों समाजजनों की उपस्थिति में पारंपरिक गोंडी रीति-रिवाजों के साथ उन्हें यह महती जिम्मेदारी सौंपी गई। इस नेतृत्व परिवर्तन से पूरे गोंड समाज में हर्ष और उत्साह का माहौल है।
ऐतिहासिक धमधा गढ़ में हुआ पारंपरिक राजतिलक
दुर्ग जिले का धमधागढ़ रविवार को हजारों गोंड आदिवासियों के विशाल जमावड़े का गवाह बना। अवसर था गोंडवाना गोंड महासभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष कमलेश सोरी के राजतिलक का। छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र श्याम के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सामूहिक पारंपरिक ‘गोंडी नेंग’ (रीति-रिवाज) के उद्वाचन के साथ श्री सोरी का राजतिलक संपन्न कराया गया। इससे पूर्व, समाज ने सर्वसम्मति से उनके निर्वाचन पर अपनी आधिकारिक मुहर लगाई।

धमधागढ़ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
धमधागढ़ का इतिहास काफी समृद्ध है और यह गोंडवाना साम्राज्य के ऐतिहासिक बावन गढ़ों में से एक माना जाता है। तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में राजा विजय सांड ने इस गढ़ की स्थापना की थी। बीसवीं शताब्दी तक यहां राजा पराऊ साय और उनके वंशज बुढान साय का गहरा प्रभाव रहा। 19वीं सदी के अंत में यहां संरक्षक आत्माराम का भी ऐतिहासिक उल्लेख मिलता है।
आजादी के बाद से इस गढ़ का नेतृत्व क्रमशः डोगेंद्र सिंह (1947-1992), लाल हरी सिंह (1993-1998), माधव सिंह (1999-2005) और 2006 से मंगलदास ठाकुर ने किया। अब दशकों पुरानी इस परंपरा को लोकतांत्रिक रंग देते हुए कमलेश सोरी को इस ऐतिहासिक गढ़ की कमान सौंपी गई है।

प्रदेश भर से उमड़ा गोंड समाज
इस दो दिवसीय महाअधिवेशन में छत्तीसगढ़ के सभी संभागों से गोंड समाज के प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विशेष रूप से बिलासपुर संभाग के खरौद राज, मालखरौदा राज, ताला रूद्र महासभा, मल्हार राज और मुंगेली राज के पदाधिकारियों की उत्साहजनक भागीदारी रही।
विभिन्न केंद्रों से आए प्रमुख नेताओं ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
🔸 खरौद राज (परसाहीनाला): इंदरमन प्रसाद मरकाम, छेदीलाल नेताम, भागवत सिंह जगत।
🔸 ताला रूद्र महासभा (मुरकुटा चक): अध्यक्ष धनुष मरावी, राजाराम पोरते, अनिल मरावी।
🔸 मल्हार राज (खम्हार डीह चक): संरक्षक डॉ. के.आर. जगत, दाऊराम मरावी, महासिंह नेताम।
🔸 मुंगेली राज (बिरकोनी चक): संरक्षक आजु राम छेदैहा, अध्यक्ष भरत लाल पोरते, रामस्वरूप खुशरो।
इनके अलावा दर्जनों रायपंच, दीवान, सेवादार और सक्रिय सदस्यों ने इस गरिमामय आयोजन में भाग लिया।
महासभा में अध्यक्ष पद के लिए अपनाई गई चुनावी प्रक्रिया और उसके बाद पारंपरिक रूप से हुआ राजतिलक, आदिवासी समाज में आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं के बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है। यह बदलाव इंगित करता है कि गोंड समाज नई पीढ़ी को आगे लाने और संगठन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।




