छुरिया के आदिवासी गोंड समाज की उम्मीदें होंगी पूरी – एक करोड़ की लागत से बनेंगे सामाजिक भवन और छात्रावास: स्थल निरीक्षण पूर्ण

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राजनांदगांव (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की छुरिया तहसील के आदिवासी गोंड समाज के लिए एक लंबे इंतजार की शुरुआत अब सार्थक होती दिख रही है। मंत्री श्री रामविचार नेताम द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस, 29 जून 2025 को की गई घोषणा – जिसमें 50 लाख रुपए से तहसील स्तरीय आदिवासी सामाजिक भवन और 50 लाख रुपए से पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास निर्माण का वादा किया गया था – अब 2026 में जमीनी हकीकत बनती नजर आ रही है। रविवार को मंडी बोर्ड विभाग के इंजीनियर विशेष दुबे ने छुरिया पहुंचकर दोनों प्रस्तावित भवनों के निर्माण स्थलों का विधिवत निरीक्षण किया।

घोषणा से जमीन तक – एक साल बाद हलचल
रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर की गई उस घोषणा ने छुरिया तहसील के आदिवासी समाज में उम्मीद की एक नई किरण जगाई थी। अब करीब एक वर्ष बाद इस योजना की क्रियान्वयन प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है। निरीक्षण के दौरान समाज के प्रतिनिधि राजेश्वर ध्रुव, अशोक मरकाम और वन समिति अध्यक्ष मनभावन सिंह उइके उपस्थित रहे तथा उन्होंने इंजीनियर को दोनों चिन्हित स्थलों का अवलोकन कराया।

कहाँ पर बनेंगे दोनों भवन?
पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास के लिए छुरिया तहसील कार्यालय क्षेत्र में स्थित वर्तमान बालक प्री-मैट्रिक छात्रावास के पीछे की भूमि चिन्हित की गई है – जो स्थान की दृष्टि से न केवल उपयुक्त है, बल्कि छात्रों के लिए सुविधाजनक भी रहेगी।

“तहसील स्तरीय आदिवासी गोंड समाज भवन” के लिए वन विभाग डिपो के आगे, फिल्टर प्लांट पानी टंकी से लगी वन अधिकार भूमि चिन्हित की गई है – यह भूमि समाज द्वारा स्वयं चयनित है और इसमें एक सामुदायिक अपनेपन की भावना झलकती है।

दस्तावेजी प्रक्रिया भी पूर्ण
उल्लेखनीय है कि चिन्हित वन भूमि के उपयोग से संबंधित समस्त आवश्यक प्रक्रिया वन समिति अध्यक्ष मनभावन सिंह उइके द्वारा पहले ही पूर्ण कर ली गई है। संबंधित दस्तावेज संबंधित विभाग को प्रेषित किए जा चुके हैं, जिससे निर्माण कार्य में अनावश्यक विलंब की संभावना काफी कम हो गई है।

समाज के लिए अब क्या होगा बदलाव?
छुरिया जैसे तहसील क्षेत्र में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास का न होना आदिवासी युवाओं की पढ़ाई की राह में एक बड़ी बाधा रही है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले होनहार बच्चे अक्सर उच्च शिक्षा से इसलिए वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके पास रहने की सुविधा नहीं होती। यह छात्रावास उन सपनों को एक छत दे सकता है।

वहीं, सामाजिक भवन का निर्माण गोंड समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक बैठकों और सामूहिक निर्णयों के लिए एक स्थायी मंच देगा – जो अब तक उनके पास नहीं था।

स्थल निरीक्षण पूर्ण होने के बाद अब निर्माण की औपचारिक स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया की बारी है। समाज के प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि प्रशासनिक कार्रवाई शीघ्र पूरी होगी और धरातल पर काम जल्द शुरू होगा।
“छुरिया का आदिवासी गोंड समाज इस बार अपने हक की इमारत को उठते हुए देखने को तैयार है।”

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