Amritkal

ये अमृत काल की अमृत संसद है मित्रों!

(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा) प्राब्लम यह नहीं है कि महुआ मोइत्रा की संसद की सदस्यता चली गयी है। प्राब्लम यह है कि महुआ मोइत्रा और वास्तव में सारे विपक्ष वाले पूरे मामले को ही गलत समझ रहे हैं। मोइत्रा चीख-चीखकर...
- Advertisement -spot_img

Latest News

बिरसा की विरासत से खिलवाड़: आदिवासी अधिकारों पर हिंदुत्व का नया दांव

क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाती है आदिवासियों की संवैधानिक पहचान? आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान को...
- Advertisement -spot_img