SECL की वादाखिलाफी से उग्र हुआ आक्रोश: भू-विस्थापितों का 18 मार्च से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान

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कोरबा/गेवरा (आदिनिवासी)। कोयला खनन क्षेत्र में लंबे समय से उपेक्षा और अधूरे वादों का बोझ झेल रहे भू-विस्थापित ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरईबोध और तहसील दीपका के प्रभावित गांवों के लोगों ने प्रबंधन के खिलाफ एक बार फिर आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। ग्रामीणों ने 18 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन धरने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा कर दी है।

टूटे भरोसे ने फिर भड़काया आंदोलन
दरअसल, बीते दिनों ग्रामीण अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। 8 मार्च 2026 को SECL प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि तीन प्रभावित लोगों को तत्काल वैकल्पिक रोजगार दिया जाएगा और शेष पात्र लोगों के लिए बी-फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस लिखित भरोसे पर विश्वास जताते हुए ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो रोजगार मिला और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ी, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष पनप गया।

‘झूठे आश्वासन’ का आरोप, बढ़ी नाराज़गी
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया है कि SECL प्रबंधन ने उन्हें जानबूझकर गुमराह किया। पिछले 2-3 महीनों से रोजगार के नाम पर केवल टालमटोल किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन वादों के आधार पर उन्होंने अपना आंदोलन रोका था, उन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस रवैये को उन्होंने “तानाशाही और संवेदनहीन” करार दिया है।

क्या हैं भू-विस्थापितों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:—

🔸सभी पात्र भू-विस्थापितों को तत्काल स्थायी रोजगार दिया जाए।
🔸उचित बसाहट और मुआवजा राशि का शीघ्र वितरण किया जाए।
🔸वैकल्पिक रोजगार की रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए।

18 मार्च से अनिश्चितकालीन धरना
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 17 मार्च 2026 तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तो 18 मार्च से वे गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अपने अधिकारों को लेकर वे किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि यदि आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है या क्षेत्र में अशांति फैलती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन की होगी। इस संबंध में प्रशासन को भी अवगत करा दिया गया है।

खनन परियोजनाओं से विकास की बातें तो बार-बार की जाती हैं, लेकिन उसी विकास की कीमत चुकाने वाले भू-विस्थापितों के अधिकार कब सुनिश्चित होंगे- यह सवाल एक बार फिर गेवरा की धरती से उठ खड़ा हुआ है।
यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है।

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