बुधवार, जनवरी 21, 2026

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की चुनौती! सिविल सोसाइटी को आगे आने की जरूरत: केआर शाह

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आदिवासी विकास परिषद की प्रेस वार्ता

कोरबा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के आर शाह का कहना है कि मोदी सरकार देश के मौजूदा संविधान को बदलकर तानाशाही व्यवस्था लागू करना चाहती है। उनका कहना है कि भारत का संविधान और लोकतंत्र खतरे में हैं और इन्हें बचाने के लिए सभी सामाजिक संगठनों को मुखर होकर आगे आना होगा।

श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार वास्तव में कॉर्पोरेटी सरकार है जो उद्योगपतियों के हाथों की कठपुतली बन गई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के सामने आदिवासियों और उनके जल, जंगल, जमीन का के मौलिक और संवैधानिक अधिकार को सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने 2023 में वन भूमि अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पांचवीं और छठवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों की भूमि को बिना ग्राम सभा की अनुमति के अधिग्रहित किया जा सकता है।
आदिवासी विकास परिषद के नेता श्री शाह का कहना है कि देश तेजी से अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहा है। स्वायत्त संस्थाओं पर शासन का पूर्ण नियंत्रण है और मीडिया को स्वतंत्र कार्य करने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को भी स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने से रोका जा रहा है। उन्होंने सरगुजा और बस्तर में भूमि अधिग्रहण की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार के पुनः सत्ता में आने पर इन क्षेत्रों की जमीनें उद्योगपतियों को दे दी जाएंगी।
आदिवासी नेता श्री के आर शाह ने कहा कि वर्तमान लोकसभा चुनाव आदिवासियों के अस्तित्व को संरक्षित रखने वाला चुनाव है। उन्होंने सभी सिविल सोसायटी संगठनों से सामाजिक न्याय के लिए मुखर होकर आगे आने और मोदी सरकार को पुनः सत्ता में काबिज़ होने से रोकने का आह्वान किया है। प्रेस वार्ता में उनके साथ आदिवासी विकास परिषद के वरिष्ठ आदिवासी नेता श्री केआर राज एवं श्री एसपी मरकाम एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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