मंगलवार, जून 25, 2024

रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर 17 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट महाघेराव के लिए एकजुट हुए भू विस्थापित किसान

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40 से अधिक गांव के भू विस्थापित किसान कलेक्ट्रेट घेराव में होंगे शामिल

कोरबा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने बरसों पुराने भूमि अधिग्रहण के बदले लंबित रोजगार प्रकरण, मुआवजा, पूर्व में अधिग्रहित जमीन वापसी, प्रभावित गांव के बेरोजगारों को खदान में काम देने, महिलाओं को स्वरोजगार, पुनर्वास गांव में बसे भू विस्थापितों को काबिज भूमि का पट्टा देने के साथ 20 सूत्रीय मांगो को लेकर 17 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट कार्यालय का महाघेराव की घोषणा की है।

जिला प्रशासन और एसईसीएल के आश्वासन से थके भूविस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने की तैयारी को लेकर गांव गांव में माईक प्रचार, पोस्टर चपकाने के साथ घर घर पर्चे बांटे गये हैं।
17अक्टूबर को कलेक्ट्रेट कार्यालय के महाघेराव को सफल बनाने के लिए 350 दिनों से चल रहे धरना स्थल में भू विस्थापितों की बैठक हुई और आंदोलन को सफल बनाने की रणनीति भी तैयार की गई। भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव,दामोदर श्याम किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,जय कौशिक ने आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
कलेक्ट्रेट घेराव आंदोलन को भू विस्थापितों के साथ आम जनता का भी व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।

किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन इसके बाद भी किसी सरकार ने, जिला प्रशासन और खुद एसईसीएल ने विस्थापित परिवारों की कभी सुध नहीं ली। आज भी हजारों भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और बसावट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस क्षेत्र में जिला प्रशासन की मदद से एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भूविस्थापितों के चल रहे संघर्ष में हर पल उनके साथ खड़ी है।
किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, जय कौशिक आदि ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। इसलिए किसान सभा और भू विस्थापित संगठनों को मिलकर संघर्ष तेज करना होगा, ताकि सरकार और एसईसीएल की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके।
प्रचार के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं जुड़ रही हैं। किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने कहा कि घेराव में 40 से अधिक प्रभावित गांव के भू विस्थापित किसान शामिल होंगे।

भू-विस्थापितों की प्रमुख मांगे
1) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों का तत्काल निराकरण कर सभी भू विस्थापितों को रोजगार प्रदान किया जाये।
2) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है उन सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
3) शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को रोजगार प्रदान किया जाये।
4) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित किये गये जमीनों को मूल किसानों को वापस किया जाये।
5) आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाये एवं गांव के किसानों की जमीनों का पूर्ण अधिग्रहण किया जाये।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित गांव के बेरोजगारों को खदान में होने वाले कार्यों का प्रशिक्षण देकर रोजगार दिया जाये।
8) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
9) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
10) पुनर्वास गांव गंगानगर में तोड़े गए मकानों, शोचालायो का क्षतिपूर्ति मुआवजा तत्काल दिया जाये।
11) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।
12) बांकी माईन्स की बंद खदान के पानी को मड़वाढोंढा,बांकी बस्ती,पुरैना और आस पास के खेतों की सिंचाई और तीनों गांव के तालाबों को भरने की व्यवस्था की जाये।
13) पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।
14) भू विस्थापित परिवार के बच्चों को निशुल्क शिक्षा एवं स्कूल बसों में फ्री पास उपलब्ध कराया जाये।
15) भू विस्थापित परिवारों के सभी सदस्यों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा प्रदान किया जाये।
16) एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में स्कूल बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
17) रोजगार के लिए पूर्व में प्रशासन द्वारा जारी सत्यापन के आधार पर रोजगार प्रदान किया जाये।

18) पुराने लंबित रोजगार प्रकरण में जिन भू विस्थापितों का सत्यापन नहीं हुआ है उनका शिविर लगाकर सत्यापन कराया जाये।
19) कुसमुंडा परियोजना के विस्तार के कारण ग्राम खोडरी में किसानों का फसल नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा दिया जाये।
20) जिन किसानों के जमीन एसईसीएल में अधिग्रहण हुआ है उन्हें जब तक रोजगार, मुआवजा एवं अन्य सुविधा प्रदान नहीं की जाती तबतक भू विस्थापित किसान के जमीन पर किसी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जाये।


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