शुक्रवार, फ़रवरी 20, 2026

कोरबा: जल जंगल जमीन की लड़ाई; वेदांता प्रबंधन पर ग्राम पंचायत की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप; ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

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कोरबा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ में ‘जल, जंगल और जमीन’ को बचाने की मुहिम अब केवल नारा नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। सरगुजा और रायगढ़ के बाद अब यह आग कोरबा तक पहुंच गई है। सोमवार को कोरबा जनपद पंचायत के अधीन आने वाले ग्राम पंचायत दोंदरो के ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और वे अपनी फरियाद लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। ग्रामीणों ने बालको-वेदांता प्रबंधन पर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने और बाउंड्रीवाल बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?
सोमवार को आयोजित ‘कलेक्टर जनदर्शन’ में ग्राम पंचायत दोंदरो के सरपंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। उनके हाथों में शिकायती पत्र और चेहरों पर अपनी जमीन छिन जाने का खौफ और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए लिखित ज्ञापन के अनुसार:-

🔸अवैध निर्माण: बालको प्रबंधन द्वारा ग्राम पंचायत की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बालको टाउनशिप की बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है।

🔸अधिकारियों पर आरोप: शिकायत पत्र में बालको के सीएसआर हेड देव आशीष दास, मेंटनेंस हेड सुमंत सिंह, अभय राज सिंह, राजेश सिंह और रंजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

🔸दुर्व्यवहार: ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपनी जमीन बचाने की बात करते हैं, तो उक्त अधिकारी कथित तौर पर ‘दादागिरी’ पर उतार आते हैं और अभद्र भाषा (गाली-गलौज) का प्रयोग करते हैं।

प्रशासन की उदासीनता और बढ़ता आक्रोश
यह विडंबना है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई और अवैध कब्जों को लेकर ग्रामीण लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। हाल ही में सरगुजा और रायगढ़ में इन्हीं मुद्दों को लेकर हुई हिंसक झड़पों में न केवल आम जनता, बल्कि कई अधिकारी और कर्मचारी भी घायल हुए थे। इसके बावजूद, कोरबा में भी प्रशासन उसी अनदेखी की राह पर चलता दिखाई दे रहा है।

वेदांता का पक्ष नदारद
पत्रकारिता के नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए, जब इस गंभीर मुद्दे पर बालको के जनसंपर्क अधिकारी विजय बाजपेई से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। फोन का जवाब न देना या चुप्पी साधना कई सवालों को जन्म देता है कि क्या वास्तव में वेदांता प्रबंधन के पास इन आरोपों का कोई जवाब नहीं है?

भविष्य की राह और चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे शांत नहीं बैठेंगे। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने की बात कही है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन सरगुजा और रायगढ़ की घटनाओं से सबक लेते हुए समय रहते इस समस्या का निराकरण करता है, या फिर कोरबा भी एक नए संघर्ष और अशांति का केंद्र बन जाएगा।

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