गुरूवार, जून 13, 2024

हूल दिवस: आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने जल जंगल जमीन व खनिज पर कॉरपोरेट लूट के विरुद्ध संघर्ष आगे बढ़ाने का लिया संकल्प

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रामगढ़-हजारीबाग (आदिनिवासी)। हूल दिवस के अवसर पर 30 जून को भाकपा-माले, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, रामगढ़-हजारीबाग जिला स्तरीय कार्यकर्ताओं को लेकर आदिवासी संघर्ष मोर्चा कार्यालय अरगड्डा में कन्वेंशन संपन्न हुई।
कन्वेंशन की अध्यक्षता कुलदीप बेदिया, सोहराय किस्कू और संचालन लालचंद बेदिया एवं नरेश बडाईक ने किया। कन्वेंशन में भाकपा-माले रामगढ़ जिला सचिव-भुनेश्वर बेदिया, जयनंदन गोप, महादेव राम,रुपन गोप और आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक- देवकीनंदन बेदिया, नरेश बड़ाईक, नीता बेदिया, नागेश्वर मुंडा, मनाराम मांझी, सोहन बेदिया, सरयू बेदिया, भुनेश्वर बेदिया, महादेव राम, शैलेन्द्र बेदिया, रामबृक्ष बेदिया, बृजनारायण मुंडा, लाका बेदिया, लालदेव करमाली, तृतियाल बेदिया, राजू विश्वकर्मा, रंजीत बेदिया, जितू बेदिया, लालकुमार बेदिया, योगेंद्र बेदिया, सुलेंद्र हेम्ब्रम, नरेश गंझू अन्य कई लोग उपस्थित थे।

हूल दिवस के मौके पर वक्ताओं ने कहा कि रामगढ़- हजारीबाग जिले में चल रहे आदिवासियों के भू-वापसी आदेशों के लिए संघर्ष करना। गैर मजरुआ बंदोबस्ती, व भूमिदान में मिली आदि जमीनों का रसीद काटने के सवाल पर आंदोलन करना। प्रशासनिक अधिकारियों एवं दलाल व 7विचौलिओं की मिलीभगत से गैर-आदिवासियों के द्वारा हड़पी गई एवं हड़पी जा रही जमीन वापसी के लिए संघर्ष करेगी। सर्वे भूमि बंदोबस्त कार्यालय हजारीबाग के द्वारा आदिवासियों की जमीनों को गैर-आदिवासियों के नाम खाता देने के खिलाफ में आंदोलन तेज करना।
काजू बगान खुली अरगड्डा खदान में सीसीएल महाप्रबंधक की मनमानी के खिलाफ आदिवासी संघर्ष मोर्चा आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

“पेसा कानून, सीएनटी/एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू करो। आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन-खनिज पर कॉरपोरेट लूट के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया। वनाधिकार कानून 2006 एवं 2008 आदिवासियों के हित में सख्ती से लागू करो और वन संरक्षण कानून 2022 को शीघ्र वापस लो।” जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर आदिवासियों ने सामने लाकर संघर्ष को तेज करने का उलगुलान किया गया।
संताल सामाजिक संगठन “ओल चिकी हुल बैसी, झारखंड प्रदेश” ने संताली भाषा ओलचिकी को प्रथम राज्य का भाषा की मान्यता एवं ओलचिकी लिपी की पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांगों को आदिवासी संघर्ष मोर्चा 04 जुलाई 2023 के झारखंड बंद को सक्रिय समर्थन करती है। अंत में आदिवासी संघर्ष मोर्चा के सदस्यता एवं सांगठनिक निर्माण पर जोर देने का निर्णय लिया गया ।


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