शुक्रवार, जून 21, 2024

छत्तीसगढ़: आदिवासी एकता महासभा राज्य समिति का सम्मेलन संपन्न

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सूरजपुर (आदिनिवासी)। सूरजपुर के ग्राम कल्याणपुर में पूर्व घोषणा के अनुरूप जिला सूरजपुर के ग्राम कल्याणपुर में आदिवासी एकता महासभा राज्य समिति का दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन संगठन के राष्ट्रीय समिति पूर्व सांसद डॉक्टर वास्क ने किया। उद्घाटन भाषण देते हुए डॉ बके ने देश के समक्ष आदिवासी अस्मिता के खतरों के बारे में आगाह किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे राजनीतिक पार्टी का शासन है जो की आदिवासियों की अस्मिता एवं पहचान को ही खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहां की आज ऐसे लोगों का शासन स्थापित हो गया है जिन्होंने देश की आजादी में कभी भी भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे विचारधारा को मानने वाले लोग शासनारूढ हैं, जो आजादी के लिए संघर्ष करने वालों के विरुद्ध अंग्रेजों से मिलकर विविध प्रकार के रोड़े अटकाया करते थे। यहीं तक नहीं बल्कि वे अंग्रेजों के लिए जासूसी का भी काम किया करते थे।

यह वही लोग हैं जिन्होंने भगत सिंह सहित हजारों आजादी के दीवानों के विरुद्ध अदालतों में गवाही दिया। इसके विरुद्ध देश की आजादी के लिए संघर्ष करने में आदिवासियों का अग्रणी योगदान रहा है, जिस पर हमें गर्व है।किंतु खेद की बात है कि आज ऐसे लोग देश की शासन सत्ता पर काबिज होकर आदिवासियों का जीना हराम करने पर तुले हुए हैं ये हमें बाँटने पर हमारी पहली प्राथमिकता है कि ऐसे लोगों को देश के शासन सत्ता से उखाड़ फेंकना है।
पिछले सम्मेलन से लेकर के वर्तमान सम्मेलन तक के संगठन एवं आंदोलन गत की रिपोर्टिंग राज्य सचिव साथी बाल सिंह ने प्रस्तुत किया।जिसे कुछ संशोधनों के साथ सर्व सम्मती से स्वीकार किया गया।

अंत में 15 सदस्यीय नए राज्य समिति का चुनाव किया गया जिसमें बाल सिंह आडिल्य, कृष्ण कुमार लकड़ा, सुरेंद्र लाल सिंह नेटी, राम साय पैकरा, रामलाल हसदा, माधव सिंह, रोशन नागेश, श्रीमती नीलम सिंह, श्रीमती मीना सिंह टेकाम, चुने गए और चार स्थान रिक्त रखा गया है। साथी सुरेंद्र लाल सिंह नेटी को अध्यक्ष तथा साथी बाल सिंह आंडिल्य को सचिव चुना गया। कोषाध्यक्ष रामलाल हसदा उपाध्यक्ष जयकुमार सिदार एवं सह सचिव कृष्ण कुमार लकड़ा चुने गए।

इस राज्य सम्मेलन के पश्चात गठित राज्य समिति को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए सीटू के राज्य समिति के महासचिव एमके नंदी ने कहा कि नई राज्य समिति पूरे छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को संगठित करने का कार्य करेगी और राज्य में आदिवासी आंदोलन को नए आयाम प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि खेद की बात है कि आज आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर संकट आन खड़ा हुआ है।

बस्तर से लेकर के सरगुजा तक आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। एक तरफ सरकार और दूसरी तरफ नक्सली आदिवासियों का कत्लेआम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सली आंदोलन सरकार द्वारा प्रायोजित आंदोलन है, सरकार और नक्सली एक दूसरे के लिए सह अस्तित्व का काम कर रहे हैं। यही कारण है कि नक्सली समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूरे छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को जनवादी ढंग से संगठित करने की जरूरत है। जिसे आदिवासी एकता महासभा पूरा करेगी। धन्यवाद ज्ञापन एवं सम्मेलन समाप्ति कि घोषणा समय लाल तिर्की ने किया।


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