गुरूवार, जनवरी 22, 2026

चर्चा-समीक्षा

आदिवासी हिंदू क्यों नहीं हैं?

भारत में अनुसूचित आदिवासी समूहों की संख्या 700 से अधिक है। भारत में 1871 से लेकर 1941 तक हुई जनगणनाओं में आदिवासियों को अन्य धर्मों से अलग धर्म में गिना गया। जैसे 1871 में ऐबरजिनस (मूलनिवासी), 1881 और 1891...

अमित शाह की खिलाड़ियों से मुलाक़ात: सौ कोड़े खाने के बाद फिर सौ प्याज खाने का समय

शनिवार 03 जून की रात यौन उत्पीडन के खिलाफ आन्दोलनरत खिलाड़ियों की गृहमंत्री अमित शाह से हुयी मुलाक़ात के बाद गोदी मीडिया ने खिलाड़ियों के डर जाने, आन्दोलन के बिखर जाने और साक्षी मलिक और नाबालिग बच्ची के...

हादसा नहीं काण्ड है, और मानवीय चूक नहीं, नीतियों की अमानवीयता की मिसाल है बालासोर की मौतें

02 जून की शाम 07 बजे ओड़िसा के बालासोर रेलवे स्टेशन के करीब तीन रेलगाड़ियों के आपस में भिड़ जाने के हादसे में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 290 मौतें गिनी जा चुकी हैं। करीब 1000 घायल मिल...

कानून का राज खत्म होने की दहलीज पर

अदालत में वकील साथियों से बातचीत में मैंने कहा कि देश में कानून का राज खत्म होने की दहलीज पर है और बस एक चर्चा शुरू हो गई। जो निष्कर्ष निकल कर आए, वे निम्न हैं:- 1) सर्वोच्च न्यायालय...

उद्घाटन: नई संसद भवन का या रेंगती धार्मिक राजशाही का?

नरेंद्र मोदी के राज के नौ साल की एक अनोखी उपलब्धि है। कथनी और करनी में अंतर तो संभवत: हरेक राज में ही होता है, पर मोदी राज में इस अंतर को बढ़ाते-बढ़ाते इतनी ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया...

कबीर: आध्यात्म, व्यवसाय, सत्ता और यथार्थ

आज से लगभग 568 वर्ष पूर्व सद्गुरु कबीर साहब का जन्म/प्राकट्य बताया जाता है। उनकी जीवन काल के दौर के भारतीय समाज मे धर्म और आडम्बर आधारित मतभेद के कारण कबीर एक क्रांतिकारी विचारधारा प्रवर्तक बनकर सामने आये। भारतीय...

इस्‍तीफ़ा न मांगियो कोय

व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा किसी ने सही कहा है कि इस्‍तीफ़ा मांगने वालों को तो इस्‍तीफ़ा मांगने का बहाना चाहिए। बताइए, बालासोर में रेल दुर्घटना हुई नहीं कि आ गए इस्‍तीफ़ा मांगने - रेल मंत्री इस्‍तीफ़ा दो! और कुछ इस्‍तीफ़ा-याचकों...

जहां भी किया, जो भी किया, मोदी ने किया, लेकिन किया क्या? हवन किया, हवन किया और हवन किया!

न्यू इंडिया की विशेषता है कि जो भी करेंगे मोदी ही करेंगे, 28 मई को भी यही हुआ - जो भी किया, संसद की नयी बिल्डिंग से लेकर जंतर मंतर होते हुए उज्जैन के महांकाल तक जो भी, जहां...

नई संसद के उद्घाटन का विपक्ष द्वारा बहिष्कार लोकतांत्रिक विरोध का एक रूप है

सार्वजनिक जीवन में प्रतीकों का बहुत महत्व होता है। प्रतीकों का चुनाव और प्रक्षेपण विचारधारा, संस्कृति, इतिहास, विश्वदृष्टि आदि-इत्यादि को दर्शाता है। 75 साल पहले संविधान सभा के ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र में, एक औपचारिक समारोह में, स्वतंत्रता सेनानी और...

राजदंड बिन सून सब तरफ!

व्यंग : राजेंद्र शर्मा विपक्ष वालों! ऐसी भी क्या तंग–दिली। संसद की नई बिल्डिंग बनवाने के लिए न सही‚ नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने तक का सारा बोझ अकेले ही उठाने के लिए भी न सही‚ पर कम-से-कम नये इंडिया...

Latest News

कोरबा शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी भर्ती: अनंतिम मूल्यांकन पत्रक जारी; दावा-आपत्ति 29 जनवरी तक

कोरबा (आदिनिवासी)। एकीकृत बाल विकास परियोजना, कोरबा (शहरी) अंतर्गत नगर निगम क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की भर्ती...