गुरूवार, जनवरी 22, 2026

हर सुबह नाश्ता, हर दिन स्कूल!

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कोरबा के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने की अनोखी पहल, 1.2 लाख विद्यार्थियों को मिला लाभ।

कोरबा (आदिनिवासी)| जिले में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए गर्म नाश्ते की पहल ने शिक्षा और पोषण दोनों में सुधार लाने का काम किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड) के तहत यह योजना शुरू की है, जिससे जिले के 1 लाख 20 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

पहाड़ी कोरवा बच्चों में भी बदलाव
पहाड़ी कोरवा जनजाति के बच्चों, जैसे बम्लेश्वर और सम्लेश्वर, में इस योजना का खासा प्रभाव देखा गया है। पहले स्कूल जाने से कतराने वाले ये बच्चे अब सुबह समय पर थैला लेकर स्कूल पहुंचते हैं। इनकी मां निहारोबाई बताती हैं कि गर्म नाश्ते, जैसे पोहा, भजिया, खीर, और पूड़ी मिलने से उनके बच्चों का स्कूल के प्रति लगाव बढ़ा है।

स्कूलों में उपस्थिति में सुधार
जिले के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों और स्व-सहायता समूहों की मदद से सुबह 9:30 से 10 बजे के बीच गर्म नाश्ता परोसा जाता है। शिक्षिका सुमित्रा मार्को कहती हैं कि उनकी कक्षा के 37 बच्चों में अब नियमितता बढ़ गई है। पहले बच्चे कई तरह के बहाने बनाकर स्कूल नहीं आते थे, लेकिन अब गर्म नाश्ते के आकर्षण ने इस समस्या को दूर कर दिया है।

नाश्ता योजना का दायरा बढ़ा
14 अगस्त 2024 को इस योजना की शुरुआत कोरबा ब्लॉक के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में की गई थी। दीपावली के बाद इसे जिले के सभी विकासखंडों में लागू कर दिया गया।
कलेक्टर अजीत वसंत ने निर्देश दिए हैं कि नाश्ते का मीनू बच्चों की पसंद और स्थानीय सामग्री के अनुसार तैयार हो। योजना के लिए हर साल डीएमएफ से 8 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

शिक्षा और पोषण का संगम
नाश्ता तैयार करने वाली स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जैसे संतोषी समूह, बताती हैं कि नाश्ते में खिचड़ी, हलवा, उपमा, और पूड़ी जैसे व्यंजन परोसे जाते हैं, जो बच्चों को बेहद पसंद आते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि में सुधार साफ नजर आता है।

उत्साहजनक परिणाम
जिला शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय के अनुसार, इस योजना ने जिले के शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में अहम भूमिका निभाई है। योजना का सीधा असर बच्चों की नियमितता और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ा है।

नाश्ते की सफलता का प्रभाव
इस पहल ने न केवल बच्चों के पोषण में सुधार किया है, बल्कि उन्हें स्कूल से जोड़ने में भी सफलता पाई है। कोरबा जिले के सुदूर इलाकों में रहने वाले बच्चे अब सुबह-सुबह स्कूल आने के लिए उत्साहित रहते हैं। इस योजना ने शिक्षा को मजबूती और बच्चों को खुशहाली का एक नया आयाम दिया है।

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