मंगलवार, दिसम्बर 16, 2025

BALCO पर शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप: आदिवासी संगठन ने की जांच और कार्रवाई की मांग

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“जमीन दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप”

कोरबा (आदिनिवासी)| छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) पर शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध बहुमंजिला निर्माण का गंभीर आरोप लगाया गया है। आदिनिवासी गण परिषद ने जिला दंडाधिकारी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की तत्काल जांच और न्यायिक कार्रवाई की मांग की है।

संगठन का कहना है कि बालकोनगर, सेक्टर-6 में BALCO द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य को पूर्व में प्रशासन ने प्रतिबंधित किया था, बावजूद इसके कंपनी ने निर्माण कार्य फिर से शुरू कर दिया है, जो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 का उल्लंघन है।

आरोपों का विस्तृत विवरण
🔹 शासकीय भूमि पर निर्माण
BALCO पर आरोप है कि उसने बालकोनगर के सेक्टर-6 में सरकारी जमीन पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व जिला कलेक्टर रानू साहू, एसडीएम श्री नायक और तहसीलदार श्री साहू ने इस स्थान पर निर्माण पर रोक लगाई थी। बावजूद इसके, निर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया।

🔹 भूमि स्वामित्व में अनियमितता
संगठन का दावा है कि जिस भूमि पर निर्माण हो रहा है, उसकी स्वामित्व स्थिति स्पष्ट नहीं है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, और वैधानिक दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं। भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास अधिनियम, 2013 का भी संभावित उल्लंघन बताया गया है।

🔹 खसरा रिकॉर्ड में विसंगतियां
1973 में BALCO को जिस खसरा नंबर की भूमि आवंटित की गई थी, वर्तमान निर्माण स्थल उस रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। इससे दस्तावेजों में हेराफेरी और भूमि के अनधिकृत हस्तांतरण की आशंका जताई गई है।

🔹 नजरी नक्शे पर संदेह
पूर्व पटवारी द्वारा प्रदान किया गया नजरी नक्शा भी संदेह के घेरे में है। भू-राजस्व संहिता की धारा 117 के अनुसार, नक्शे की वैधता का विधिवत सत्यापन जरूरी है।

🔹 पूर्व अतिक्रमण के साक्ष्य
BALCO पर पहले भी थाना परिसर के पास शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण करने का आरोप लगा था। एक अनुपयोगी थाना भवन को पिछले 12 वर्षों से उसी भूमि पर छोड़ दिया गया है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कानूनी पहलू और मांगें
शिकायत पत्र में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के उल्लंघन की बात कही गई है, जिनमें धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (दस्तावेज जालसाजी) और 447 (आपराधिक अतिचार) शामिल हैं। साथ ही, भू-राजस्व संहिता की धाराओं 115, 117, 248, और 250 के उल्लंघन की बात कही गई है।

मुख्य मांगें:

1. उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन
2. निर्माण कार्य पर तत्काल रोक
3. समस्त अतिक्रमणों की व्यापक जांच
4. दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई

यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला न केवल शासकीय भूमि की सुरक्षा बल्कि उद्योगों के लिए बनाई गई भूमि नीति की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। यह मामला आदिवासी समुदायों के अधिकारों और सरकारी संपत्ति के संरक्षण के लिहाज़ से भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। प्रशासन की निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई से शासन पर जनता का विश्वास बना रहेगा।

आदिवासी संगठन ने राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा और जनहित के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस मामले में न्यायोचित और संवेदनशील हस्तक्षेप की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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