रायगढ़ (आदिनिवासी)। तमनार की फिजाओं में पिछले कुछ दिनों से घुला तनाव अब भरोसे और शांति में बदल गया है। रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जनसुनवाई को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच रविवार की शाम एक नई उम्मीद लेकर आई। जिला प्रशासन और प्रभावित 14 गांवों के प्रतिनिधियों के बीच हुई मैराथन शांति वार्ता सफल रही है। प्रशासन के संवेदनशील रवैये और ग्रामीणों की लोकतांत्रिक समझ के चलते क्षेत्र में अब शांति बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
संवाद से निकला समाधान
यह सफलता अनायास ही नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे जिला प्रशासन की पिछले दो दिनों की लगातार कोशिशें थीं। तमनार जनपद पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में रविवार देर शाम आयोजित इस अहम बैठक में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौजूद रहे। बैठक का माहौल पूरी तरह सकारात्मक रहा, जहां प्रशासन ने ग्रामीणों की बात सुनी, वहीं ग्रामीणों ने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को समझा।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में 8 दिसंबर 2025 को धौंराभांठा बाजार मैदान में आयोजित जनसुनवाई थी। ग्रामीण इस जनसुनवाई की प्रक्रिया और परिणामों को लेकर चिंतित थे और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
रविवार को हुई बैठक में प्रशासन ने स्पष्टता के साथ ग्रामीणों के सामने अपनी बात रखी:-
🔹प्रक्रिया पर भरोसा: प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के बाद निस्तीकरण (Disposal) की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
🔹कानूनी आश्वासन: अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही सभी बिंदुओं पर विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी नियम की अनदेखी नहीं होगी।
🔹आम आदमी की जीत: लोकतंत्र और विश्वास की बहाली
इस घटना को केवल एक प्रशासनिक बैठक के रूप में देखना बेमानी होगा। यह उस आम आदमी की जीत है जो अपनी जमीन, अपने अधिकार और अपने भविष्य के लिए चिंतित था। बैठक में 14 गांवों के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष भी शामिल हुए।
महिलाओं की उपस्थिति ने यह साबित किया कि यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि हर उस घर की थी जो इस फैसले से प्रभावित होने वाला था। जब प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से बात रखी, तो ग्रामीणों ने भी बड़े दिल के साथ सहयोग का हाथ बढ़ाया। दोनों पक्षों ने एक सुर में कहा कि क्षेत्र में शांति और सौहार्द सबसे ऊपर है।
शांति वार्ता के बाद तमनार के आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं और जनजीवन सामान्य होने की ओर है। ग्रामीणों ने आश्वासन दिया है कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखेंगे और प्रशासन का सहयोग करेंगे।
यह घटनाक्रम एक नजीर पेश करता है कि चाहे मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों, ‘संवाद’ ही वह पुल है जो प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पाट सकता है। तमनार में आज उम्मीद की एक नई सुबह हुई है।




