गुरूवार, जनवरी 22, 2026

मठ ध्वंस पर माकपा का विरोध: एसईसीएल के खिलाफ चक्काजाम का ऐलान!

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18 अक्टूबर को माकपा का बड़ा प्रदर्शन, एसईसीएल की जवाबदेही की मांग

कोरबा (आदिनिवासी)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा गंगानगर के पुनर्वासित ग्रामीणों की सहमति के बिना उनके मठ को क्षतिग्रस्त किए जाने का कड़ा विरोध किया है। माकपा का आरोप है कि एसईसीएल द्वारा बनाई जा रही सड़क के निर्माण कार्य के दौरान, लापरवाही से मठ को नुकसान पहुंचाया गया है। माकपा ने इस घटना को ग्रामीणों की आस्था और परंपरा पर हमला करार देते हुए 18 अक्टूबर को गेवरा-कुसमुंडा बाईपास ट्रक रोड पर चक्काजाम करने का ऐलान किया है।
माकपा की मुख्य मांग है कि मठों (स्मारकों) को ग्रामीणों की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार विस्थापित किया जाए, ताकि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे। इस विषय में पार्टी ने एसडीएम कटघोरा और एसईसीएल गेवरा महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।

पृष्ठभूमि और ग्रामीणों की पीड़ा
गौरतलब है कि वर्ष 1981-82 में एसईसीएल ने ग्राम घाटमुड़ा का अधिग्रहण किया था, और वहां के निवासियों को गंगानगर में पुनर्वासित किया गया था। लेकिन उन्हें आज तक पूर्ण पुनर्वास सुविधाएं नहीं दी गईं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण श्मशान घाट के लिए भूमि का न मिलना शामिल है। मजबूरी में ग्रामीणों ने अपने पूर्वजों की याद में एक मठ का निर्माण किया, जो अब उनकी सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रतीक बन चुका है।
एसईसीएल की लापरवाही के चलते सड़क निर्माण कार्य के दौरान इस मठ को क्षति पहुंचाई गई, जिससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। मठ को नष्ट करना उनके पूर्वजों की यादों और परंपराओं का अपमान है, जिसे ग्रामीण बर्दाश्त नहीं कर सकते।

माकपा का रुख और आगे की योजना
माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने बताया कि मठ केवल एक संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था और सम्मान का प्रतीक है। इसे क्षतिग्रस्त करना असामाजिक और अनैतिक कार्य है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अगर एसईसीएल जबरन इस तरह की कार्रवाई करता है, तो इससे शांति भंग हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और एसईसीएल की होगी।”

चक्काजाम की घोषणा
माकपा ने मांग की है कि प्रशासन और एसईसीएल दोनों ही इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और ग्रामीणों की सहमति के साथ मठ को विस्थापित करने की प्रक्रिया को तुरंत पूरा करें। साथ ही, मठ को क्षति पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अगर 18 अक्टूबर तक समाधान नहीं हुआ, तो माकपा ने गेवरा-कुसमुंडा बाईपास रोड पर चक्काजाम करने की चेतावनी दी है।
यह मुद्दा न केवल ग्रामीणों की धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि उनके सांस्कृतिक और सामाजिक अधिकारों की भी बात करता है। ऐसे में, इस विवाद का समाधान जल्द से जल्द निकालना प्रशासन और एसईसीएल की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में शांति और सद्भाव बना रहे।

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