कोरबा (आदिनिवासी)। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र में जबरन खदान विस्तार के विरोध और रोजगार - पुनर्वास की मांग को लेकर बुधवार को छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में सैकड़ों भू-विस्थापितों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय के...
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की स्थापना केवल एक राजनीतिक संगठन के गठन की घटना नहीं, बल्कि भारत के शोषित, पिछड़े और आदिवासी समुदायों के सामाजिक-राजनीतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक आवश्यकता थी। इस पार्टी के संस्थापक दादा हीरा सिंह...
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ (आदिनिवासी)। देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति गवई पर वरिष्ठ वकील राकेश किशोर द्वारा जूता फेंकने की घोर निंदनीय घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बताया गया कि इस दौरान हमलावर ने “सनातन...
भारतीय तिथि के अनुसार 2 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना को सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। पिछले 11 वर्षों से आरएसएस, जो एक सांप्रदायिक-फासीवादी संगठन है, देश पर शासन कर रहा है और भारत...
कोरबा (आदिनिवासी)। सर्व आदिवासी समाज जिला कोरबा ने लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत डिटेन किए जाने का कड़ा विरोध जताया है। इसी संबंध में समाज के पदाधिकारियों ने...
कोरबा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास के नए द्वार खुल गए हैं। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से इस क्षेत्र में 640 विभिन्न विकास कार्यों के लिए 186 करोड़ 90 लाख रुपये से...
कोरबा (आदिनिवासी)। एसईसीएल की गेवरा खदान के विस्तार कार्य और सड़क खनन के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में भू-विस्थापित ग्रामीणों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी उत्पन्न हुई।...
"मानवीय शोषण का बढ़ता संकट: धर्म, कानून और राजनीति के जाल में फंसे समाज की गहरी सच्चाई, अन्याय और उससे मुक्ति के रास्तों पर विचारोत्तेजक विश्लेषण।"
मानव सभ्यता के लंबे इतिहास में शोषण कोई नया शब्द नहीं है। परंतु आज जब...
आज, जब हम महान क्रांतिकारी और विचारक शहीद भगत सिंह की 118वीं जयंती मना रहे हैं, यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या उनके सपनों का भारत बन पाया है? भगत सिंह ने जिस शोषण-मुक्त और न्यायपूर्ण समाज की...
भारत के अस्तित्व में आदिवासी समाज का स्थान सबसे प्राचीन, सबसे विशिष्ट और सबसे महत्वपूर्ण है। "आदिवासी" मात्र एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान है, जो जल-जंगल-जमीन, श्रम, सामूहिकता और समानता की जीवनदृष्टि में निहित है। लेकिन दुखद...