दुर्ग (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक धमधागढ़ में 13 और 14 जून को आयोजित दो दिवसीय गोंडवाना महाअधिवेशन का समापन कमलेश सोरी के पारंपरिक राजतिलक के साथ हुआ। हाल ही में संपन्न हुए लोकतांत्रिक चुनावों में श्री सोरी को केंद्रीय गोंडवाना गोंड महासभा का अध्यक्ष चुना गया था। रविवार को हजारों समाजजनों की उपस्थिति में पारंपरिक […]
हिंदू राज्य, जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है, एकाधिकार पूंजी की तानाशाही के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे मोदी बेशर्मी से बढ़ावा दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का उद्देश्य भारत में एक हिंदू राज्य की स्थापना करना है। लेकिन हिंदू राज्य का वास्तव में क्या अर्थ है? इसका सीधा और […]
रायपुर (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के भीतर नेतृत्व, कार्यशैली और सांगठनिक प्राथमिकताओं को लेकर वैचारिक मतभेद सतह पर आ गए हैं। संगठन के संस्थापक सदस्य हरेंद्र कुमार नेताम के द्वारा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के.आर. शाह के हाशिए पर होने और उनके खिलाफ षड्यंत्र के आरोपों के बाद, आदिवासी समाज के भविष्य को लेकर […]
सांस्कृतिक संरक्षण के लिए बनी साझा रणनीति
कोरबा (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के गुमिया गांव में आदिवासी बियार समाज का एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन और भगवान बिरसा मुंडा शहादत दिवस गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस आयोजन में...
जैसे-जैसे रात गहरी होती है, शहर खामोश हो जाता है। फिर भी, उसी खामोशी के बीच कुछ रातें ऐसी भी होती हैं, जब बुलडोज़रों की दहाड़ इतिहास को रात से भी कहीं ज़्यादा गहरे अंधेरे में धकेल देती है।कुछ...
क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाती है आदिवासियों की संवैधानिक पहचान?
आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान को लेकर खड़ा हुआ बड़ा संकट
सांस्कृतिक समागम के नाम पर संस्कृति से खिलवाड़!
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े जनजाति सुरक्षा मंच और...
कॉर्पोरेट जगत और सत्ता के गलियारों का रिश्ता हमेशा से ही 'शह और मात' के खेल जैसा रहा है। हाल के दिनों में वेदांता समूह के सुप्रीमो अनिल अग्रवाल के संस्थानों पर जांच एजेंसियों की सक्रियता ने देश के राजनीतिक...
धमतरी (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ के धमतरी में सोमवार को सर्व आदिवासी समाज ने सोशल मीडिया (ऑनलाइन मंच) पर अपनी संस्कृति के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के इस्तेमाल के विरोध में कोतवाली थाने...
उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक हिंदी पत्रकारिता के दो सौ बरस (30 मई 1826 - 30 मई 2026)
यूं तो हाल के लगभग डेढ़ दशक भारतीय प्रेस – विशेषकर हिंदी भाषी प्रेस -- के धीरे-धीरे तेज से तेजतर हुए...