रायपुर (आदिनिवासी)। मोदी सरकार द्वारा “विकसित भारत 2047” के नाम पर पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026 देश के मेहनतकश लोगों, आदिवासियों और गरीबों के लिए विस्थापन और शोषण का एक नया दस्तावेज साबित हो सकता है। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) छत्तीसगढ़ ने इस बजट को पूरी तरह जन-विरोधी और कॉर्पोरेट-परस्त करार देते हुए खारिज कर दिया है।
राज्य महासचिव बृजेंद्र तिवारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह बजट सिर्फ अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों के हितों की सेवा करता है। माइनिंग और रेयर अर्थ कॉरिडोर, हाई स्पीड रेल कॉरिडोर और कई इंडस्ट्रियल पार्क, खासकर टेक्सटाइल पार्क की घोषणाएं “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के नाम पर आदिवासियों और गरीबों के बड़े पैमाने पर विस्थापन और पर्यावरण विनाश का रोडमैप तैयार करती हैं।
संगठन ने चिंता जताई है कि MGNREGA को व्यावहारिक रूप से खत्म कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों के लिए न्यूनतम रोजगार गारंटी भी समाप्त हो गई है। विजन 2047 की बातें आज की पीढ़ी के लिए बेमानी हैं, जबकि युवाओं और लाखों बेरोजगारों के लिए रोजगार सबसे जरूरी और तात्कालिक मुद्दा है।
AICCTU ने आरोप लगाया है कि वित्त मंत्री डीरेगुलेशन और लेबर कोड को “विकास” का मंत्र बता रही हैं, लेकिन यह विकास केवल उद्योगपतियों की दौलत और बिना नौकरियों का विकास है। लेबर कोड लागू करके श्रम बाजार को उदार बनाने की कोशिश कॉर्पोरेट लूट और मुनाफे को आसान बनाने के अलावा कुछ नहीं है। उत्पादन और क्रय शक्ति बढ़ाने के बजाय, सरकार मजदूरों के चरम शोषण के जरिए कॉर्पोरेट्स के लिए विकास का लक्ष्य बना रही है।
संगठन ने कहा कि बजट उन मजदूरों की समस्याओं को हल करने में पूरी तरह असफल रहा है जो वेतन में कमी, नौकरी से इनकार और सामाजिक सुरक्षा की कमी का सामना कर रहे हैं। सामाजिक क्षेत्र और आवंटन को नजरअंदाज किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS), मिड डे मील (MDM) जैसी समाज कल्याण योजनाओं के लिए बजट आवंटन में भारी कटौती की गई है। कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसे मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन घटाया गया है।
इसके विपरीत, BJP सरकार कॉर्पोरेट मुनाफे और सबसे अमीर लोगों की आय पर कर दर बढ़ाने से इनकार कर रही है, जबकि कर चोरों को मामलों से छूट का ऐलान कर रही है।
AICCTU ने कहा कि आय असमानता के मुख्य मुद्दे को सुलझाए बिना कुल मांग नहीं बढ़ाई जा सकती। लेकिन बजट में इस मुख्य मुद्दे को सुलझाने के लिए सही विजन और नजरिए की कमी दिखी। आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए सिर्फ सकल निवेश को बढ़ावा देना काफी नहीं है।
संगठन ने कहा कि आक्रामक नवउदारवादी नीति का बुलडोजर चलाने के बाद, विकास के दावों के उलट, अर्थव्यवस्था पहले से ही गिरावट में है। यह रुपये की गिरती कीमत, घटते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और गिरते निजी घरेलू निवेश में साफ दिख रहा है।
AICCTU ने याद दिलाया कि मोदी सरकार विदेशी काला धन वापस लाने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। लेकिन 12 साल बाद भी बजट में विदेशी संपत्ति और आय के स्वत: खुलासे की योजना का ऐलान किया गया है, जो अजीब है।
AICCTU ने इस जन-विरोधी और कॉर्पोरेट-परस्त बजट को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए मेहनतकश लोगों से अपील की है कि वे 12 फरवरी की हड़ताल को जबरदस्त कामयाब बनाकर मोदी सरकार को करारा जवाब दें।




