बुधवार, जनवरी 21, 2026

छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया इतिहासिक धरोहर – आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय

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रायपुर (आदिनिवासी)। छत्तीसगढ़ की धरती पर आदिवासी वीरों के शौर्य, संघर्ष और बलिदान की गाथाओं को जीवंत करने वाला शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय अब अपने अंतिम चरण में है। नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में बन रहे इस भव्य संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी राज्य स्थापना दिवस और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर करने वाले हैं।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंगलवार को निर्माणाधीन संग्रहालय का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संग्रहालय की प्रत्येक सामग्री उच्च गुणवत्ता की हो और निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न हो।

बोरा ने कहा कि यह संग्रहालय न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लोगों के लिए प्रेरणा का केन्द्र बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को आदिवासी सेनानियों के साहस और त्याग से परिचित कराएगा।

संग्रहालय में छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख आदिवासी आंदोलनों और विद्रोहों जैसे –

हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया और मुरिया विद्रोह, रानी चैरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह

के संघर्ष और बलिदान को जीवंत चित्रण, मूर्तियों और डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, भगवान बिरसा मुंडा और रानी गाइडल्यू की मूर्तियां भी यहां स्थापित की जाएंगी।

संग्रहालय के फर्श पर ट्राइबल आर्ट को विशेष रूप से अंकित किया जाएगा।

संग्रहालय के डिजिटाइजेशन का कार्य तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

यहां खुलने वाली स्मृति वस्तु (सोवेनियर) शॉप को गढ़कलेवा, ट्राईफेड या किसी प्रतिष्ठित संस्था को सौंपा जाएगा, जहां केवल ट्राइबल उत्पादों की बिक्री होगी।

गौरतलब है कि संग्रहालय का निर्माण कार्य 30 सितंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव और रजत जयंती वर्ष पर जनता को समर्पित होगा।

निरीक्षण बैठक में आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, राज्य अंत्यावसायी निगम के संचालक जगदीश कुमार सोनकर, संचालक टीआरटीआई हिना अनिमेष नेताम, संयुक्त सचिव बी.के. राजपूत, अपर संचालक जितेंद्र गुप्ता, उपायुक्त गायत्री नेताम, कार्यपालन यंत्री त्रिदीप चकवर्ती सहित निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, क्यूरेटर और इंजीनियर्स मौजूद रहे।

 यह संग्रहालय आदिवासी शौर्य और स्वतंत्रता संग्राम की अमर स्मृति होगा। यह आने वाली पीढ़ियों को बताएगा कि कैसे आदिवासी समाज ने अपनी धरती, अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया।

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