शुक्रवार, जून 14, 2024

सरकार ने खाद्य तेल, तिलहन की जमाखोरी रोकने के लिए शुरू किया नया अभियान, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

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सरकार ने खाद्य तेलों की बढ़ती खुदरा कीमतों को रोकने और तिलहनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने कहा कि उसने खाद्य तेलों (Edible Oil) और तिलहनों (Oilseeds) की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए एक निरीक्षण अभियान शुरू किया है. भारत खाद्य तेल की घरेलू मांग के 60 फीसदी से अधिक को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग प्रकार के खाना पकाने के तेलों की खुदरा कीमतों में तेजी आई है. कई सरकारी उपायों के बावजूद कीमतों में मजबूती जारी है. खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि सरकार ने खाद्य तेल की कीमतों में नरमी के लिए कई उपाय किए हैं. हमने हाल ही में खाद्य तेलों और तिलहनों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए एक अप्रैल से निरीक्षण अभियान शुरू किया है.

पांडे ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ एक केंद्रीय टीम विभिन्न तिलहनों और खाद्य तेल उत्पादक राज्यों में निरीक्षण कर रही है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को अब कवर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा.

सरकार ने उठाये हैं ये कदम

अन्य उपायों के बारे में सचिव ने कहा कि सरकार पहले ही खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती कर चुकी है. इस साल के अंत तक स्टॉक रखने की सीमा बढ़ा दी है और निजी व्यापारियों के माध्यम से आयात की सुविधा के अलावा बंदरगाहों पर जहाजों की शीघ्र निकासी सुनिश्चित की है. स्टॉक लिमिट ऑर्डर को लागू करने के लिए आठ केंद्रीय टीमों को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है.

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आठ राज्यों के चुनिंदा जिलों में जमीनी स्तर पर खाद्य तेलों और तिलहनों के स्टॉक की जांच के लिए औचक निरीक्षण चल रहा है यानी खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं, बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसर के साथ.

ये राज्य हैं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली. बयान में कहा गया है कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodities Act) के प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी.

इसके अलावा, पांडे ने कहा, केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ नियमित बैठक कर रहा है कि खुदरा विक्रेताओं द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य का खुदरा विक्रेताओं द्वारा पालन किया जाए.

खाने के तेल की कीमतों में आया तेज उछाल

सूरजमुखी के तेल के मामले में सचिव ने कहा कि रूस और यूक्रेन दो प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं और निजी व्यापारी अन्य देशों से स्रोत के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह बहुत कम मात्रा में होगा.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल की औसत खुदरा कीमतों में तेज उछाल आया है.

इस साल 1 जनवरी को 161.71 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 4 अप्रैल को सूरजमुखी तेल की औसत खुदरा कीमत 184.58 रुपये प्रति किलोग्राम थी. इसी तरह, सोयाबीन तेल का औसत खुदरा मूल्य 148.59 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 162.13 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि पाम तेल का उक्त अवधि में 128.28 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 151.59 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है.

4 अप्रैल को मूंगफली के तेल की औसत कीमत 181.74 रुपये प्रति किलोग्राम थी, लेकिन सरसों के तेल 2.78 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 188.54 रुपये हो गया.


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